कर्मण: सुकृतस्याहु: सात्त्विकं निर्मलं फलम् |
रजसस्तु फलं दु:खमज्ञानं तमस: फलम् || 16||
कर्मण:-कर्म का; सु-कृतस्य-शुद्ध; आहुः-कहा गया है; सात्त्विकम् सत्त्वगुण; निर्मलम्-विशुद्ध; फलम्-फल; रजसः-रजोगुण का; तु-लेकिन; फलम् परिणाम; दुःखम्-दुःख; अज्ञानम्-अज्ञानता; तमसः-तमोगुण का; फलम्-फल
BG 14.16: ऐसा कहा जाता है कि सत्त्वगुण में सम्पन्न किए गये कार्य शुभ फल प्रदान करते हैं, रजोगुण के प्रभाव में किए गये कर्मों का परिणाम पीड़ादायक होता है तथा तमोगुण से सम्पन्न किए गए कार्यों का परिणाम अंधकार है।
सत्त्वगुणों से प्रभावित लोग शुद्धता, सदाचार और नि:स्वार्थ भावना से परिपूर्ण होते हैं। इसलिए उनके कर्मों का सम्पादन शुद्ध मनोभावना और निःस्वार्थ भाव से युक्त होता है और इसके परिणाम उन्हें आत्मिक उत्थान और संतोष प्रदान करते हैं। वे जो रजोगुण से प्रभावित होते हैं वे अपनी इन्द्रियों और कामनाओं से उद्वेलित होते हैं। अपने कार्य के पीछे उनका उद्देश्य स्वयं और अपने संबंधियों की उन्नति तथा इन्द्रियों का तुष्टिकरण करना होता है। इस प्रकार से उनके कार्य उन्हें इन्द्रिय सुखों की ओर ले जाते हैं जो आगे चलकर उनकी इन्द्रिय तृप्ति की वासनाओं को और अधिक भड़काते हैं। वे जिनमें तमोगुण की प्रधानता होती है वे शास्त्रों और स्मृतियों का सम्मान नहीं करते। इस प्रकार वे तुच्छ सुखों के लिए पापमयी कार्य करते हैं जो आगे चलकर उन्हें दुःखसागर में डुबा देते हैं।
कर्मण: सुकृतस्याहु: सात्त्विकं निर्मलं फलम् |
रजसस्तु फलं दु:खमज्ञानं तमस: फलम् || 16||
ऐसा कहा जाता है कि सत्त्वगुण में सम्पन्न किए गये कार्य शुभ फल प्रदान करते हैं, रजोगुण के प्रभाव में …
Sign in to save your favorite verses.
Sign Inपवित्र भगवद्गीता के शाश्वत प्रेरणादायक ज्ञान से अपना दिन शुरू करें, जो सीधे आपके ईमेल पर पहुँचे!
Welcome 🙏
Here's what you've unlocked
Bookmarks
Save verses for quick return
Notes
Write your own reflections
Progress
Track all 18 chapters
Verse of the Day
A new shloka in your inbox daily